Bihar
राहुल गांधी ने तेजस्वी को दी चेतावनी — कहा: सीट बंटवारा जल्दी करें,否则 कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी
पटना / नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के संभावित सहयोगी तेजस्वी यादव को चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि यदि आरजेडी के नेतृत्व वाली टीम जल्द ही सीट बंटवारा नहीं प्रस्तुत करती है, तो कांग्रेस स्वतंत्र रूप से अपने उम्मीदवार उतारेगी।
राहुल का प्रेसर, तेजस्वी पर दबाव
राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि कांग्रेस अपनी अदल-बदल की रणनीति को तैयार रखने को तैयार है, लेकिन वह चाहती है कि आरजेडी जल्द से जल्द सीट बंटवारा प्रस्ताव रखे।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि सहयोगी दलों को स्पष्ट व प्रतिबद्ध प्रस्ताव देना ज़रूरी है —
“अगर सीट बंटवारा फाइनल नहीं हुआ, तो कांग्रेस को पीछे नहीं हटना पड़ेगा।”
गठबंधन की खींचतान बढ़ी
राहुल के इस बयान ने महागठबंधन के अंदर खींचतान को और बढ़ा दिया है।
आरजेडी समर्थक दलों में इस पर चर्चा ज़ोर पकड़ गई कि कांग्रेस की सख्ती से कांग्रेस–आरजेडी संबंध पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम कांग्रेस की स्वायत्तता और रणनीतिक दबाव की चेतावनी हो सकती है।
कांग्रेस की तैयारियाँ और रणनीति
कांग्रेस आलाकमान ने साफ कर दिया है कि यदि सीट बंटवारा मसला अनिर्णित रहा, तो पार्टी स्वयं मैदान में उतरेगी।
पार्टी नेताओं को संकेत दिया गया है कि वे संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार रखें।
कांग्रेस के राज्य इकाईयों ने भी दलगत कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का निर्देश जारी किया है।
राजनीतिक प्रभाव और संभावनाएँ
विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह कदम गठबंधन दबाव युद्ध का हिस्सा हो सकता है — जहां कांग्रेस अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहती है।
यदि गठबंधन व्यवस्था टूटती है, तो बिहार की राजनीति में तीन ध्रुवीय मुकाबला देखने को मिल सकता है — आरजेडी, कांग्रेस और NDA (नीतीश–भाजपा)।
मतदाता वर्ग इस समय गठबंधन स्थिरता, विकास एजेंडा और राजनीतिक भरोसे को लेकर अधिक संवेदनशील है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी की चेतावनी ने सीट बंटवारे के मसले को बिहार 2025 की राजनीति में मुख्य विवाद बिंदु बना दिया है।
अब सवाल यह है कि तेजस्वी यादव नेतृत्व समिति किस रूप में प्रतिक्रिया देती है — सहयोगी बने रहने की नीति अपनाएगी या कांग्रेस को मैदान में उतरने का अवसर मिले।
आने वाले दिनों में यह पता चल जाएगा कि बिहार की राजनीतिक तस्वीर कितनी स्पष्ट और कितनी जटिल होगी।