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पश्चिम चम्पारण में कांग्रेस का ऐतिहासिक कमबैक, प्रियंका गांधी बनीं बदलाव की नई धुरी

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पश्चिम चम्पारण की राजनीति वर्ष 2025 में ऐसा करवट बदली है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। 53 और 25 साल की खामोशी को तोड़ते हुए कांग्रेस ने ज़िले में जोरदार वापसी की है। चनपटिया और वाल्मीकि नगर—इन दो महत्वपूर्ण सीटों पर कांग्रेस की जीत ने न सिर्फ बिहार में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है बल्कि यह संदेश भी दिया है कि प्रियंका गांधी की सक्रियता कांग्रेस के लिए नए युग की शुरुआत कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह पूरा उलटफेर प्रियंका गांधी वाड्रा की आक्रामक चुनावी रणनीति और मुद्दा-आधारित प्रचार का परिणाम है, जिसने स्थानीय चिंता को चुनाव के केंद्र में खड़ा कर दिया।

53 साल बाद चनपटिया में कांग्रेस का परचम

चानपटिया सीट कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक साबित हुई।
1972 के बाद पहली बार, यानी 53 वर्ष बाद, कांग्रेस ने यहां जीत का स्वाद चखा है।

कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक रंजन ने भाजपा विधायक उमाकांत सिंह को 602 वोटों से हराया, और यह जीत कांग्रेस के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही है।

प्रियंका गांधी की जनसभाओं में उठाए गए मुद्दे—

बेरोजगारी

पलायन

किसानों की बदहाली

स्थानीय उद्योगों का संकट

महिलाओं की सुरक्षा
ने सीधे मतदाताओं के दिल पर असर डाला।

वहीं, चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार मनीष कश्यप के उतरने से भाजपा का वोट बैंक बिखरा, जिसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिला और मुकाबला रोमांचक हो गया।

वाल्मीकि नगर में जदयू को झटका, कांग्रेस ने लिखी नई कहानी

वाल्मीकि नगर में कांग्रेस ने उस इतिहास को पलट दिया, जहां यह सीट लंबे समय से एनडीए और जदयू की मजबूत पकड़ मानी जाती थी।

कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद ने जदयू के दिग्गज विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह (रिंकू सिंह) को 1,675 वोटों से हराया।

इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी रोचक रहा है—

जब यह धनहा क्षेत्र का हिस्सा था, तब 1990 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।

2010 में वाल्मीकि नगर नई सीट बनी, जहां से बसपा की जीत ने शुरुआत की।

इसके बाद सीट जदयू और आरजेडी के बीच घूमती रही।

लेकिन इस बार प्रियंका गांधी की विशाल रैलियाँ, स्थानीय मुद्दों की पैनी प्रस्तुति और नेतृत्व की सीधी अपील ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए।

कांग्रेस का ‘पुनरुत्थान’—पश्चिम चम्पारण से शुरू

कांग्रेस की यह दोहरी जीत केवल सीटें नहीं, बल्कि संगठन में नई ऊर्जा का संचार है।

युवा

महिलाएं

पहली बार वोट करने वाले
इन सभी वर्गों में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती दिखी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता बताती है कि प्रियंका गांधी की सक्रियता कांग्रेस को बिहार में नए सिरे से खड़ा कर सकती है। पश्चिम चम्पारण में मिली जीत पार्टी के लिए पुनरुत्थान की शुरुआत मानी जा रही है।

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बिहार को मिलेगा नया केंद्रीय विश्वविद्यालय, विक्रमशिला स्थल के पास जमीन अधिग्रहण तेज

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भागलपुर में विक्रमशिला खुदाई स्थल के पास प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भू-अर्जन विभाग ने रैयतों की सूची जारी कर दी है। शिक्षा विभाग ने 4.29 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा है, जो खुदाई स्थल के निकट स्थित है और भविष्य में खुदाई की संभावनाओं वाले क्षेत्र में आती है।

जमीन की कीमत तय करेगी समिति

जमीन की कीमत निर्धारण के लिए एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। फिलहाल भू-अर्जन विभाग की टीम सर्वेक्षण कार्य में जुटी है। रैयतों की सूची प्रकाशित होने के बाद 60 दिनों तक दावा-आपत्ति दर्ज की जा सकेगी। इसके बाद जिलाधिकारी स्तर पर समिति मूल्य निर्धारण कर वाजिब रैयतों को नोटिस भेजेगी और भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी।

215 एकड़ भूमि चिह्नित

विश्वविद्यालय निर्माण के लिए कुल 215 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसमें अंतिचक में 92 एकड़ 70 डिसमिल, मलकपुर में 84 एकड़ 33 डिसमिल और 28 एकड़ 33 डिसमिल बिहार सरकार की भूमि शामिल है। रैयती भूमि पर कोई आवास नहीं है, जबकि सरकारी जमीन पर कुछ झोपड़ियां मौजूद हैं।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय का निर्माण भागलपुर के शिक्षा और ऐतिहासिक महत्व को नई पहचान देगा।

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