Connect with us

Bihar

जेडीयू नेता का इस्तीफा, लगाए गंभीर आरोप

Published

on

पटना (बिहार)। चुनाव के मद्देनज़र जेडीयू के एक नेता जय कुमार सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, जेडीयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी ने भी उनके आरोपों को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

जय कुमार सिंह ने कहा है कि पार्टी नेतृत्व के साथ उन्हें कई तरह की अनदेखी और अन्याय का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि विचारों को दबाया गया, उनकी आवाज़ को अनसुना किया गया और उन्हें पार्टी में उचित सम्मान नहीं मिला। इनमें कई मुद्दे ऐसे थे जो उन्होंने पार्टी आलाकमान के सामने उठाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

इसी बीच, जेडीयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी ने कहा है कि जय कुमार सिंह के आरोप निराधार हैं। पार्टी का कहना है कि उन्होंने जो कह दिया है, उसमें कोई सच्चाई नहीं है और उनका यह कदम अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की पूर्ति करने के लिए है।

अब इस इस्तीफे के बाद राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ गई है। यह देखना बाकी है कि जय कुमार सिंह आगे क्या कदम उठाते हैं और पार्टी की ओर से किस तरह की प्रतिक्रिया सामने आती है।

Bhagalpur News

पश्चिम चम्पारण में कांग्रेस का ऐतिहासिक कमबैक, प्रियंका गांधी बनीं बदलाव की नई धुरी

Published

on

By

पश्चिम चम्पारण की राजनीति वर्ष 2025 में ऐसा करवट बदली है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। 53 और 25 साल की खामोशी को तोड़ते हुए कांग्रेस ने ज़िले में जोरदार वापसी की है। चनपटिया और वाल्मीकि नगर—इन दो महत्वपूर्ण सीटों पर कांग्रेस की जीत ने न सिर्फ बिहार में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है बल्कि यह संदेश भी दिया है कि प्रियंका गांधी की सक्रियता कांग्रेस के लिए नए युग की शुरुआत कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह पूरा उलटफेर प्रियंका गांधी वाड्रा की आक्रामक चुनावी रणनीति और मुद्दा-आधारित प्रचार का परिणाम है, जिसने स्थानीय चिंता को चुनाव के केंद्र में खड़ा कर दिया।

53 साल बाद चनपटिया में कांग्रेस का परचम

चानपटिया सीट कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक साबित हुई।
1972 के बाद पहली बार, यानी 53 वर्ष बाद, कांग्रेस ने यहां जीत का स्वाद चखा है।

कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक रंजन ने भाजपा विधायक उमाकांत सिंह को 602 वोटों से हराया, और यह जीत कांग्रेस के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही है।

प्रियंका गांधी की जनसभाओं में उठाए गए मुद्दे—

बेरोजगारी

पलायन

किसानों की बदहाली

स्थानीय उद्योगों का संकट

महिलाओं की सुरक्षा
ने सीधे मतदाताओं के दिल पर असर डाला।

वहीं, चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार मनीष कश्यप के उतरने से भाजपा का वोट बैंक बिखरा, जिसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिला और मुकाबला रोमांचक हो गया।

वाल्मीकि नगर में जदयू को झटका, कांग्रेस ने लिखी नई कहानी

वाल्मीकि नगर में कांग्रेस ने उस इतिहास को पलट दिया, जहां यह सीट लंबे समय से एनडीए और जदयू की मजबूत पकड़ मानी जाती थी।

कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद ने जदयू के दिग्गज विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह (रिंकू सिंह) को 1,675 वोटों से हराया।

इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी रोचक रहा है—

जब यह धनहा क्षेत्र का हिस्सा था, तब 1990 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।

2010 में वाल्मीकि नगर नई सीट बनी, जहां से बसपा की जीत ने शुरुआत की।

इसके बाद सीट जदयू और आरजेडी के बीच घूमती रही।

लेकिन इस बार प्रियंका गांधी की विशाल रैलियाँ, स्थानीय मुद्दों की पैनी प्रस्तुति और नेतृत्व की सीधी अपील ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए।

कांग्रेस का ‘पुनरुत्थान’—पश्चिम चम्पारण से शुरू

कांग्रेस की यह दोहरी जीत केवल सीटें नहीं, बल्कि संगठन में नई ऊर्जा का संचार है।

युवा

महिलाएं

पहली बार वोट करने वाले
इन सभी वर्गों में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती दिखी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता बताती है कि प्रियंका गांधी की सक्रियता कांग्रेस को बिहार में नए सिरे से खड़ा कर सकती है। पश्चिम चम्पारण में मिली जीत पार्टी के लिए पुनरुत्थान की शुरुआत मानी जा रही है।

Continue Reading

Bihar

चुनाव हार के बाद RJD में घमासान: तेजस्वी–रोहिणी विवाद खुलकर आया सामने, रोहिणी बोलीं—“मेरा अब कोई परिवार नहीं”

Published

on

By

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में अंदरूनी तनाव खुलकर सामने आ गया है। चुनाव नतीजों के कुछ ही घंटों बाद पार्टी नेता तेजस्वी यादव और उनकी बहन रोहिणी आचार्य के बीच जोरदार झगड़ा हुआ, जिसके बाद रोहिणी ने परिवार से नाता तोड़ने और राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया।

तेजस्वी ने कहा—“तुम्हारी वजह से हम शापित हैं” | चप्पल फेंकने तक की नौबत

एनडीटीवी के सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर तेजस्वी यादव ने चुनाव हार का ठीकरा अपनी बड़ी बहन रोहिणी पर फोड़ दिया। संवाद में तेजस्वी ने कथित रूप से कहा—
“तुम्हारे कारण हम चुनाव हार गए… तुम्हारी वजह से हम शापित हैं।”

विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में तेजस्वी ने कथित रूप से रोहिणी पर चप्पल फेंकी और उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया।

“हार की पूरी जिम्मेदारी मैं ले रही हूं” — रोहिणी

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की नौ संतानों में से एक रोहिणी आचार्य ने शनिवार को कहा कि वह परिवार से दूरी बना रही हैं और राजनीतिक जीवन समाप्त कर रही हैं।
उन्होंने कहा—
“बिहार चुनाव में हार की जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर ले रही हूं।”

“मेरा अब कोई परिवार नहीं” — रोहिणी का दर्द

रोहिणी ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि जो लोग तेजस्वी के करीबी सहयोगियों संजय और रमीज पर सवाल उठाते हैं, उन्हें परिवार से बाहर कर दिया जाता है।

उन्होंने कहा—
“मेरा अब कोई परिवार नहीं है। संजय, रमीज और तेजस्वी से पूछिए—उन्होंने मुझे परिवार से निकाल दिया क्योंकि वे जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते।”

रोहिणी ने आरोप लगाया कि परिवार में सवाल उठाने वालों की बदनामी की जाती है और उन पर चप्पलों से हमले तक किए जाते हैं।

“कल मुझे अपमानित किया गया… चप्पल उठाई गई”

रविवार सुबह एक नई पोस्ट में रोहिणी ने लिखा—
“कल एक बेटी, एक बहन, एक विवाहित महिला और एक मां को अपमानित किया गया। मुझे गंदी गालियां दी गईं, मेरे ऊपर चप्पल उठाई गई।”

उन्होंने लिखा कि यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने “अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया” और “सत्य का त्याग नहीं किया।”

“मेरी किडनी खराब बताई गई… करोड़ों लेकर ट्रांसप्लांट करवाने का आरोप लगाया गया”

एक अन्य भावुक पोस्ट में रोहिणी ने लिखा—
“कल कहा गया कि मैं बुरी हूं, मैंने करोड़ों रुपये लेकर टिकट खरीदा और अपनी खराब किडनी अपने पिता को ट्रांसप्लांट करवाई।”

याद हो कि 2022 में रोहिणी आचार्य ने अपने पिता लालू यादव को किडनी दान की थी।

“किसी भी परिवार में रोहिणी जैसी बेटी न हो” — पीड़ा भरा संदेश

रोहिणी ने पोस्ट में लिखा—
“मैंने अपने तीन बच्चों की देखभाल नहीं की, अपने पति और ससुराल वालों से अनुमति नहीं ली, बस अपने पिता को बचाने के लिए किडनी दे दी… यह आज मेरे लिए बड़ा पाप बन गया।”

उन्होंने बेटियों को संदेश देते हुए कहा—
“आपमें से कोई मेरी तरह गलती न करे। किसी भी परिवार में रोहिणी जैसी बेटी न हो।”

Continue Reading

Bihar

“फ्री एंड फेयर चुनाव होता तो BSP और सीटें जीतती” – मायावती

Published

on

By

बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होता, तो बीएसपी कई और सीटों पर जीत दर्ज कर सकती थी। उन्होंने कहा कि इस बार परिस्थितियाँ अनुकूल न होने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने मजबूती के साथ चुनाव लड़ा, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि आने वाले समय में और तैयारी के साथ काम करने की जरूरत है।

रामगढ़ सीट से सतीश कुमार की जीत पर बधाई

रविवार को मायावती ने कैमूर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट से पार्टी के एकमात्र विजयी उम्मीदवार सतीश कुमार सिंह यादव को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार अशोक कुमार सिंह को बेहद कड़े मुकाबले में मात्र 30 वोटों से हराया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मायावती ने लिखा—
“बीएसपी उम्मीदवार सतीश कुमार सिंह यादव को जीत दिलाने के लिए पार्टी के सभी लोगों को बधाई। यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है।”

“विरोधियों ने हराने की पूरी कोशिश की”

मायावती ने आरोप लगाया कि रामगढ़ सीट पर वोटों की बार-बार गिनती के नाम पर प्रशासन और विरोधी दलों ने बीएसपी उम्मीदवार को हराने की कोशिश की।
उन्होंने कहा—
“हमारे बहादुर कार्यकर्ता पूरे समय डटे रहे, इसलिए विरोधियों का षड्यंत्र सफल नहीं हो पाया।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार के अन्य कई क्षेत्रों में बीएसपी उम्मीदवारों ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष न होने के कारण वे जीत नहीं पाए।

कार्यकर्ताओं को संदेश—“घबराएँ नहीं, और मेहनत करें”

बीएसपी सुप्रीमो ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि वे हताश न हों।
उन्होंने कहा—
“अगर चुनाव फ्री एंड फेयर होते, तो बीएसपी और सीटें जीतती। इसलिए पार्टी के लोग घबराएँ नहीं, बल्कि अगले चुनावों के लिए और मजबूत तैयारी करें।”

Continue Reading

Trending