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राजनीति

पाकिस्तान की झूठी खबरों का पर्दाफाश: राफेल पायलट स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह सुरक्षित, भारत सरकार ने किया फेक न्यूज़ का खंडन

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नई दिल्ली। पाकिस्तान की सोशल मीडिया और कुछ समाचार वेबसाइटों पर फैल रही झूठी खबरों का भंडाफोड़ हो गया है। इन रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि भारतीय वायुसेना की राफेल फाइटर जेट पायलट स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह को “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान पाकिस्तान ने पकड़ लिया है।

भारत सरकार और वायुसेना ने इन सभी दावों को पूरी तरह फेक न्यूज और झूठा प्रचार करार दिया है।


🔹 PIB फैक्ट चेक ने बताया – खबर पूरी तरह झूठी

भारत सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी PIB Fact Check ने वायरल पोस्ट्स को खारिज करते हुए कहा कि

“भारतीय वायुसेना की पायलट स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह को पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया है — यह दावा पूरी तरह भ्रामक और झूठा है। वायुसेना का कोई भी पायलट लापता या पकड़ा नहीं गया है।”


🔹 पाक मीडिया चला रहा था फेक प्रोपेगेंडा

पाकिस्तान के कुछ मीडिया चैनलों और सोशल मीडिया अकाउंट्स ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक भारतीय राफेल विमान को मार गिराया गया और उसकी पायलट पाकिस्तान की हिरासत में है।
इन दावों के साथ पुरानी तस्वीरें और वीडियो जोड़े गए थे, जिन्हें गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया गया।

भारतीय सूत्रों के अनुसार, यह खबरें जानबूझकर गलत प्रचार (डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन) के तहत फैलाई गईं ताकि भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके।


🔹 संसद में नहीं उठाया गया कोई सवाल

सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया गया कि संसद में विपक्षी दलों ने “शिवांगी सिंह के लापता होने” का मुद्दा उठाया था।
लेकिन संसद की कार्यवाही के रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स में इसका कोई सबूत नहीं मिला है।
फैक्ट चेक वेबसाइटों ने भी इस दावे को फर्जी बताया है।


🔹 वायुसेना की सफाई – सभी पायलट सुरक्षित

भारतीय वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि उसके सभी पायलट सुरक्षित हैं, और किसी भी मिशन में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है।
IAF ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें।


🔹 निष्कर्ष

फिलहाल यह साफ हो गया है कि स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके पकड़े जाने या लापता होने की खबरें पाकिस्तान की ओर से फैलाई गई फेक न्यूज का हिस्सा थीं।
भारत सरकार ने ऐसे झूठे दावों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही है।

Bhagalpur News

पश्चिम चम्पारण में कांग्रेस का ऐतिहासिक कमबैक, प्रियंका गांधी बनीं बदलाव की नई धुरी

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पश्चिम चम्पारण की राजनीति वर्ष 2025 में ऐसा करवट बदली है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। 53 और 25 साल की खामोशी को तोड़ते हुए कांग्रेस ने ज़िले में जोरदार वापसी की है। चनपटिया और वाल्मीकि नगर—इन दो महत्वपूर्ण सीटों पर कांग्रेस की जीत ने न सिर्फ बिहार में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है बल्कि यह संदेश भी दिया है कि प्रियंका गांधी की सक्रियता कांग्रेस के लिए नए युग की शुरुआत कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह पूरा उलटफेर प्रियंका गांधी वाड्रा की आक्रामक चुनावी रणनीति और मुद्दा-आधारित प्रचार का परिणाम है, जिसने स्थानीय चिंता को चुनाव के केंद्र में खड़ा कर दिया।

53 साल बाद चनपटिया में कांग्रेस का परचम

चानपटिया सीट कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक साबित हुई।
1972 के बाद पहली बार, यानी 53 वर्ष बाद, कांग्रेस ने यहां जीत का स्वाद चखा है।

कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक रंजन ने भाजपा विधायक उमाकांत सिंह को 602 वोटों से हराया, और यह जीत कांग्रेस के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही है।

प्रियंका गांधी की जनसभाओं में उठाए गए मुद्दे—

बेरोजगारी

पलायन

किसानों की बदहाली

स्थानीय उद्योगों का संकट

महिलाओं की सुरक्षा
ने सीधे मतदाताओं के दिल पर असर डाला।

वहीं, चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार मनीष कश्यप के उतरने से भाजपा का वोट बैंक बिखरा, जिसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिला और मुकाबला रोमांचक हो गया।

वाल्मीकि नगर में जदयू को झटका, कांग्रेस ने लिखी नई कहानी

वाल्मीकि नगर में कांग्रेस ने उस इतिहास को पलट दिया, जहां यह सीट लंबे समय से एनडीए और जदयू की मजबूत पकड़ मानी जाती थी।

कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद ने जदयू के दिग्गज विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह (रिंकू सिंह) को 1,675 वोटों से हराया।

इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी रोचक रहा है—

जब यह धनहा क्षेत्र का हिस्सा था, तब 1990 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।

2010 में वाल्मीकि नगर नई सीट बनी, जहां से बसपा की जीत ने शुरुआत की।

इसके बाद सीट जदयू और आरजेडी के बीच घूमती रही।

लेकिन इस बार प्रियंका गांधी की विशाल रैलियाँ, स्थानीय मुद्दों की पैनी प्रस्तुति और नेतृत्व की सीधी अपील ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए।

कांग्रेस का ‘पुनरुत्थान’—पश्चिम चम्पारण से शुरू

कांग्रेस की यह दोहरी जीत केवल सीटें नहीं, बल्कि संगठन में नई ऊर्जा का संचार है।

युवा

महिलाएं

पहली बार वोट करने वाले
इन सभी वर्गों में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती दिखी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता बताती है कि प्रियंका गांधी की सक्रियता कांग्रेस को बिहार में नए सिरे से खड़ा कर सकती है। पश्चिम चम्पारण में मिली जीत पार्टी के लिए पुनरुत्थान की शुरुआत मानी जा रही है।

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Bihar

चुनाव हार के बाद RJD में घमासान: तेजस्वी–रोहिणी विवाद खुलकर आया सामने, रोहिणी बोलीं—“मेरा अब कोई परिवार नहीं”

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बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में अंदरूनी तनाव खुलकर सामने आ गया है। चुनाव नतीजों के कुछ ही घंटों बाद पार्टी नेता तेजस्वी यादव और उनकी बहन रोहिणी आचार्य के बीच जोरदार झगड़ा हुआ, जिसके बाद रोहिणी ने परिवार से नाता तोड़ने और राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया।

तेजस्वी ने कहा—“तुम्हारी वजह से हम शापित हैं” | चप्पल फेंकने तक की नौबत

एनडीटीवी के सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर तेजस्वी यादव ने चुनाव हार का ठीकरा अपनी बड़ी बहन रोहिणी पर फोड़ दिया। संवाद में तेजस्वी ने कथित रूप से कहा—
“तुम्हारे कारण हम चुनाव हार गए… तुम्हारी वजह से हम शापित हैं।”

विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में तेजस्वी ने कथित रूप से रोहिणी पर चप्पल फेंकी और उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया।

“हार की पूरी जिम्मेदारी मैं ले रही हूं” — रोहिणी

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की नौ संतानों में से एक रोहिणी आचार्य ने शनिवार को कहा कि वह परिवार से दूरी बना रही हैं और राजनीतिक जीवन समाप्त कर रही हैं।
उन्होंने कहा—
“बिहार चुनाव में हार की जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर ले रही हूं।”

“मेरा अब कोई परिवार नहीं” — रोहिणी का दर्द

रोहिणी ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि जो लोग तेजस्वी के करीबी सहयोगियों संजय और रमीज पर सवाल उठाते हैं, उन्हें परिवार से बाहर कर दिया जाता है।

उन्होंने कहा—
“मेरा अब कोई परिवार नहीं है। संजय, रमीज और तेजस्वी से पूछिए—उन्होंने मुझे परिवार से निकाल दिया क्योंकि वे जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते।”

रोहिणी ने आरोप लगाया कि परिवार में सवाल उठाने वालों की बदनामी की जाती है और उन पर चप्पलों से हमले तक किए जाते हैं।

“कल मुझे अपमानित किया गया… चप्पल उठाई गई”

रविवार सुबह एक नई पोस्ट में रोहिणी ने लिखा—
“कल एक बेटी, एक बहन, एक विवाहित महिला और एक मां को अपमानित किया गया। मुझे गंदी गालियां दी गईं, मेरे ऊपर चप्पल उठाई गई।”

उन्होंने लिखा कि यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने “अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया” और “सत्य का त्याग नहीं किया।”

“मेरी किडनी खराब बताई गई… करोड़ों लेकर ट्रांसप्लांट करवाने का आरोप लगाया गया”

एक अन्य भावुक पोस्ट में रोहिणी ने लिखा—
“कल कहा गया कि मैं बुरी हूं, मैंने करोड़ों रुपये लेकर टिकट खरीदा और अपनी खराब किडनी अपने पिता को ट्रांसप्लांट करवाई।”

याद हो कि 2022 में रोहिणी आचार्य ने अपने पिता लालू यादव को किडनी दान की थी।

“किसी भी परिवार में रोहिणी जैसी बेटी न हो” — पीड़ा भरा संदेश

रोहिणी ने पोस्ट में लिखा—
“मैंने अपने तीन बच्चों की देखभाल नहीं की, अपने पति और ससुराल वालों से अनुमति नहीं ली, बस अपने पिता को बचाने के लिए किडनी दे दी… यह आज मेरे लिए बड़ा पाप बन गया।”

उन्होंने बेटियों को संदेश देते हुए कहा—
“आपमें से कोई मेरी तरह गलती न करे। किसी भी परिवार में रोहिणी जैसी बेटी न हो।”

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Bihar

“फ्री एंड फेयर चुनाव होता तो BSP और सीटें जीतती” – मायावती

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बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होता, तो बीएसपी कई और सीटों पर जीत दर्ज कर सकती थी। उन्होंने कहा कि इस बार परिस्थितियाँ अनुकूल न होने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने मजबूती के साथ चुनाव लड़ा, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि आने वाले समय में और तैयारी के साथ काम करने की जरूरत है।

रामगढ़ सीट से सतीश कुमार की जीत पर बधाई

रविवार को मायावती ने कैमूर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट से पार्टी के एकमात्र विजयी उम्मीदवार सतीश कुमार सिंह यादव को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार अशोक कुमार सिंह को बेहद कड़े मुकाबले में मात्र 30 वोटों से हराया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मायावती ने लिखा—
“बीएसपी उम्मीदवार सतीश कुमार सिंह यादव को जीत दिलाने के लिए पार्टी के सभी लोगों को बधाई। यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है।”

“विरोधियों ने हराने की पूरी कोशिश की”

मायावती ने आरोप लगाया कि रामगढ़ सीट पर वोटों की बार-बार गिनती के नाम पर प्रशासन और विरोधी दलों ने बीएसपी उम्मीदवार को हराने की कोशिश की।
उन्होंने कहा—
“हमारे बहादुर कार्यकर्ता पूरे समय डटे रहे, इसलिए विरोधियों का षड्यंत्र सफल नहीं हो पाया।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार के अन्य कई क्षेत्रों में बीएसपी उम्मीदवारों ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष न होने के कारण वे जीत नहीं पाए।

कार्यकर्ताओं को संदेश—“घबराएँ नहीं, और मेहनत करें”

बीएसपी सुप्रीमो ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि वे हताश न हों।
उन्होंने कहा—
“अगर चुनाव फ्री एंड फेयर होते, तो बीएसपी और सीटें जीतती। इसलिए पार्टी के लोग घबराएँ नहीं, बल्कि अगले चुनावों के लिए और मजबूत तैयारी करें।”

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