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घर की रसोई से ऑस्ट्रेलिया तक—सुलोचना का धमाका

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कहते हैं जहां चाह, वहां राह… और यह बात रांची की 55 वर्षीय सुलोचना पर बिल्कुल फिट बैठती है। सुलोचना ने उम्र के इस चरण में बिज़नेस शुरू किया, और आज उनके प्रोडक्ट की धमक रांची से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक सुनाई देती है।

उन्होंने अपने घर से ही मेयोनेज़, सॉस, मसाले और हर्ब प्रोडक्ट बनाना शुरू किया। खास बात—सुलोचना अपने सभी हर्ब खुद उगाती हैं: बेसिल, ओरिगैनो, चिल्ली… सब कुछ घर की खेती से। इसी वजह से उनके प्रोडक्ट की शुद्धता की गारंटी 100% है।

उनकी हेल्थ ईटिंग कंपनी आज मसाले, सॉस, चटनियाँ, हर्ब और ओट्स-मोरिंगा जैसे हेल्थ प्रोडक्ट तैयार करती है। रांची से बाहर घूमने जाने वाले लोग इनके प्रोडक्ट थोक में खरीदते हैं।

आज उनकी फर्म में 10 से ज़्यादा लोग काम कर रहे हैं। पैकेजिंग से लेकर मसाले पीसने तक हर काम उनकी निगरानी में होता है। कंपनी लाखों का टर्नओवर कर रही है।

सुलोचना का कहना है—“बिज़नेस शुरू करने के लिए उम्र नहीं, हिम्मत चाहिए। मन में रुचि हो तो सफलता तय है।”

घर की रसोई से शुरू होकर ऑस्ट्रेलिया तक पहुँच चुकी यह कहानी सच में प्रेरणा देती है।

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